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आरबीआई ने नहीं बदली दरें, सेक्टर असंतुष्ट

Posted On: 11 Aug, 2015 Others में

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इस साल की पांचवी और वित्त वर्ष की तीसरी मोद्रिक निति में आरबीआई ने यह घोषणा करी की दरों में कोई बदलाव नहीं होगा | इस निर्णय से बिना किसी बदलाव के रेपो दर ७.२५ प्रतिशत, रिज़र्व रेपो दर ६.२५ प्रतिशत, सांविधिक तरलता अनुपात (स्टेटूटरी लिक्विडिटी रेशियो) २१.५ प्रतिशत पर और नकद आरक्षित अनुपाद (कैश रिज़र्व रेशियो) ४ प्रतिशत पर है | २५ आधार अंक के हिसाब से इस वर्ष में शिखर संसथान पहले ही तीन बार दरों में कटोती कर चुकी है, मतलब रेपो दर में कुल मिला कर ७५ आधार अंक से कम हुए है और इसे वर्ष २०१५ में ८ प्रतिशत से ७.२५ प्रतिशत तक घटा दिया है |
“इस बार दरों में बदलाव न आने की संभावना पहले से ही थी, इसका कारण है खुदरा महंगाई पिछले ८ महीने में अपने सबसे ऊँचे इस्तर पर जून के महीने में रही जो की ५.४ प्रतिशत थी, खाने की कीमते और अनियमित मानसून के कारण सिपीआई में भी बड़ोतरी हुई है | यह आरबीआई का सही फैसला है क्योंकि इस वर्ष वैसे भी तीन बार दरों में कटोती हो चुकी है | वर्त्तमान आर्थिक स्तिथि को देखते हुए यह फैसला बिलकुल सही है और यह उम्मीद लगाई जा सकती है की इस साल की आखरी तिमाही में आरबीआई दरों में कटोती कर सकता है” यह कहना है श्री दीपक कपूर, अध्यक्ष क्रेडाई-पश्चिम ऊ.प्र. और निदेशक गुलशन होज़ का | इसी मुद्दे पर विचार जोड़ते हुए श्री राजेश गोयल, उपाध्यक्ष क्रेडाई-पश्चिम ऊ.प्र. और एमडी, आरजी ग्रुप ने कहा की “बाज़ार की वर्त्तमान हालत पर नज़र डाले तो लोगो की रूचि संपत्ति बाज़ार की ओर कम है, हम उम्मीद लगा सकते है की आगे आने वाले सत्रों में आरबीआई दरों में ज़रूर कटोती करेगा | रेपो दर को स्थिर रखने का कारण देश की तंग व्यापक आर्थिक स्थिति भी रही है | नवरात्री, दशहरा और दिवाली भी आने वाले है जो की लोगो की भावनाओं पर सीधा असर डालते है और २९ सितम्बर को होने वाले सत्र में दरों में कटोती की उम्मीद की जा सकती है |”

अचल संपत्ति क्षेत्र को इस बार दरों में कटोती की उम्मीद थी ताकि बाज़ार के हालात सुधार सके | पुरे देश में कीमते काफी तेज़ी से गिरी है खासकर टियर १ क्षेत्रो में जहाँ मकान बन कर रहने के लिए तैयार है | पिछली बार कीमतों के गिरने के बाद बहुत से बैंको ने भी अपनी ऋण दरों को कम कर दिया था | “अचल संपत्ति सेक्टर की वर्त्तमान हालात को देखते हुए हम इस उम्मीद में थे की आरबीआई दरों में कमी कर के हमे एक बड़ी रहत प्रदान करेगी | भले ही रेपो दर नहीं, पर कम से कम सीआरआर को बढ़ा दे जिससे बैंक की ऋण देने की क्षमता बड़ जाएगी, जिसका फायदा सीधे ग्राहकों को मिलेगा और बाज़ार में लिक्विडिटी भी बढ़ जाएगी | अब यह उम्मीद की जा सकती है की अगले सत्र में दरों में कटोती होगी और जिससे बाज़ार के हालात फिर से सुधर जायेंगे”, यह कहना है श्री अशोक गुप्ता, सीएमडी, अजनारा इंडिया लिमिटेड का | इस वित्त वर्ष की अगली और चौथी समीक्षा निति सितम्बर २९, २०१५ को है और सबकी नज़रे श्री रघुराम राजन पर टिकी हुई होगी की वो अगली समीक्षा निति को कितना आगे ले जाते है | हिन्दू कैलेंडर के अनुसार आखरी त्यौहार का सीजन आ रहा है जो २९ सितम्बर के आस पास पढने वाला है, जिसकी शुरवात शराद से होगी उसके बाद नवरात्री, दशहरा और २० दिन बाद दिवाली तक चलेगा |

आरबीआई को अगले समीक्षा निति में दरों में कटोती करना चाहिए जो की सीधे तौर पर ग्राहकों की भावनाओ को काफी बढावा देगा | श्री प्रवीण त्यागी, सीएमडी, वीवीआईपी ने कहा की “अचल संपत्ति क्षेत्र; साल के इस आखरी त्यौहार के समय पर काफी निर्भर करता है, भारत में ग्राहक भी साल के इस मौके का खासा इंतज़ार करते है और सोना, गाड़ी, शेयर्स और प्रॉपर्टी में काफी ज्यादा निवेश करते है | नवरात्री, दशहरा और दिवाली जैसे त्योहारों से लोगो की धार्मिक भावनाएं जुड़ी होती है और डेवलपर्स भी इस समय पर बहुत अच्छी छुट और लाभ प्रदान करते है | अगर इस मौके पर आरबीआई दरों में कटोती करता है तो संपत्ति की मांग में काफी इज़ाफा होगा क्योंकि घर के लिए ऋण सस्ती दरों पर मिलेगा और साथ ही अच्छे सौदे भी ग्राहक के सामने मौज़ूद होंगे |” “आरबीआई ने साल के शुरू में किये हुए अपने वादे के अनुसार दरों में कटोती का काम शुरू कर दिया था | हालांकि हमे इस बार भी दरों में कटोती की आशंका थी जो की बाज़ार के हालात सुधरने में काफी सहायक होती | थोक महंगाई दर कम चल रही है, डब्लूपीआई नकारात्मक है और सरकार को यह उम्मीद थी की दरों में कटोती उद्योगिक विकास में भी सहायक होगी | उत्पाद क्षेत्र, बैंकिंग उद्योग, अचल संपत्ति और खुदरा क्षेत्र के आने वाले त्यौहार के सीजन में अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद है | आगे होने वाली दरों में कटोती क्षेत्रो और अर्थ व्यवस्था के लिए अच्छी खबर होगी |” यह निष्कर्ष निकाला श्री रजनीकांत शर्मा, सीएमडी, आरजे ग्रुप ने |

Web Title : RBI Keeps Rates Unchanged, Sector Not Satisfied

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