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आखिरकार नोएडा के डेवलपर्स और खरीददारों को मिला इन्साफ

Posted On: 19 Aug, 2015 बिज़नेस कोच में

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अक्टूबर २०१३ का महिना नोएडा के अचल संपत्ति सेक्टर के लिए संकट भरा था क्योंकि राष्ट्रिय हरित अधिकरण (नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल) ने यहाँ की परियोजनाओं में निवेश कर चुके डेवलपर्स और खरीददारों को ज़ोरदार झटका दिया | आज का दिन एनसीआर के इतिहास के पन्नो पर लिखे जाने योग्य है क्योंकी पर्यावरण मंत्रालय ने ओखला पक्षी अभयारण्य (ओखला बर्ड सेंचुरी) के पूर्व, पश्चिम और दक्षिण तरफ १०० मीटर और उत्तर तरफ १.२७ किलोमीटर की दुरी पर निर्माण करने के ड्राफ्ट नोटिस को अनुमति दे दी है | इन दोनों के बीच में आने वाली जगह पारिस्थितिकी संवेदनशील क्षेत्र (इको-सेंसिटिव जोन) कहलाएगी जहाँ पर कोई भी निर्माण नहीं हो सकेगा | इस फैसले का मतलब है लगभग ५० परियोजना और तक़रीबन ६०,००० खरीददारों को इन्साफ मिला हैं |

“जिस खबर का नोएडा और एनसीआर के अचल संपत्ति बाज़ार को इंतज़ार था वो आखिरकार आ गयी है | यह इस क्षेत्र के खरीददारों और विकासकर्ता दोनों के लिए बड़ी राहत पहुँचाने वाली खबर हैं क्योकि अब खरीददारों को उनके मकान मिल जाएँगे और विकास फिर से उसी तेज़ी से होना शुरू हो जाएगा | कुछ महीने पहले ग्रेटर नोएडा वेस्ट के ऊपर एक अहम फैसला आया था और अब नोएडा के बाज़ार को वो फैसला मिल गया जिसका उन्हें काफी समय से इंतज़ार था | इस क्षेत्र में अब बिना रुकावट के विकास होगा और अब लोग इस क्षेत्र की तरफ वापस रुख करेंगे और मकानों की मांग में खासा इज़ाफा देखने को मलेगा |” यह कहना है श्री दीपक कपूर, अध्यक्ष क्रेडाई पश्चिम ऊ.प्र. और निदेशक गुलशन होम्स का | इसी बात पर अपने विचार जोड़ते हुए श्री सुदीप अग्रवाल, एमडी, श्री ग्रुप ने कहा की “राष्ट्रिय हरित अधिकरण के पारिस्थितिकी संवेदनशील क्षेत्र को कम करने के फैसले ने यहाँ के हज़ारों खरीददार और डेवलपर्स को बड़ी सांत्वना दी है | एक बार नोएडा प्राधिकरण से अंतिम अधिसुची आ जाये तो डेवलपर्स को समापन प्रमाण पत्र मिल जायगा जिससे की रुका हुआ निर्माण पूरा हो सकेगा और पूरी हो चुकी परियोजनाओं का कब्ज़ा दिया जा सकेगा | लगभग ६०,००० मकान खरीददारों को नोएडा में कब्ज़ा मिल जाएगा, जो की काफ़ी ख़ुशी की बात है |”

राष्ट्रिय हरित अधिकरण अक्टूबर १०, २०१० में राष्ट्रिय हरित अधिकरण अधिनियम के तहत स्थापित हुई थी, जिसका की उस्देश्य पर्यावरण नीतियों के प्रभावी सूत्रीकरण और ध्वनि पर्यावरण और प्रकृति के सतत विकास पर प्रभाव डालने वाले व्यावसायिक गतिविधि पर नज़र रखना है | अधिकरण को वातावरण सम्बंधित मामलो में अवशक अधिकार क्षेत्र के साथ सशक्त किया गया ताकि वो उच्च न्यायालयों पर पड़ने वाले बोझ को कम कर सके | लगभग ६०,००० मकान खरीददारों का कब्ज़ा रुका हुआ था और लगभग ५० परियोजनओं पर पिछले फैसले से फर्क पड़ा था | दो सबसे ज्यादा ध्यान देने लायक बाते यह है की ज्यादातर निर्माण राष्ट्रिय हरित अधिकरण के स्थापित होने के पहले ही शुरू हो गया था और पारिस्थितिकी संवेदनशील क्षेत्र अक्टूबर २०१३ में १०० मीटर से बड़ा कर १० किलोमीटर कर दिया था जिससे की वहाँ के विकास पर काफी फर्क पड़ा था |

“नोएडा क्षेत्र का काफी समय से रुका हुआ फैसला आख़िरकार आ गया है | एक हफ्ते के अन्दर अंतिम ड्राफ्ट जनता के सामने आ जाएगा जो की ओखला पक्षी अभयारण्य की उत्तर की ओर १.२७ किलोमीटर और बाकी तीनो तरफ १०० मीटर की दुरी पर निर्माण करने की अनुमति देगा | निर्माणाधीन परियोजनाओं का काम अब वापस से शुरू हो जायेगा, पूरी हो चुकी परियोजनाओं को समापन प्रमाण पत्र मिल जायगा, खरीददार जिन्होंने यहाँ निवेश किया था उनको भी कब्ज़े हासिल हो जायेंगे और सबसे बढ़ी बात यह की नोएडा में स्थिर हो चुकी मांग वापस से बढ़ने लगेगी |” यह बताते है श्री अशोक गुप्ता, सीएमडी, अजनारा इंडिया लिमिटेड का | श्री रुपेश गुप्ता, निदेशक जेएम हाउसिंग ने कहा की “राष्ट्रिय हरित अधिकरण के २०१३ में आए फैसले के बाद से आज तक १ लाख से ज्यादा इकाईयों का निर्माण हुआ और ६०,००० से ज्यादा बन कर तैयार खड़ी है जो की उनके खरीददारों के हाथो में जाने का इंतज़ार कर रही है | सारी अटकी हुई परियोजनाओं को समापन प्रमाण पत्र मिल जायेंगे और मकान खरीददार अपने सपनो के घर में रहने के लिए जा पाएंगे | रुकी हुई परियोजनाओं का काम फिर से शुरू हो जायेगा और यह निर्माण भविष्य में नोएडा के अचल संपत्ति बाज़ार में मांग का इज़ाफा करेगा |”

निर्णय आने में इतना लम्बा समय लगने के कारण इस सेक्टर से जुड़े हुए लोग जैसे खरीददार, विकासकर्ता और प्राधिकरण ने काफी नुक्सान उठाया | “खरीददारों को किराये के रूप में ज्यादा कीमत चुकानी पड़ी क्योंकि उनका ख़रीदा हुआ मकान उन्हें नहीं मिल पा रहा था और उसी समय लोन की किश्त का भुगतान भी करना पड़ा, विकासकर्ता को इकाई अपने पास रोक कर रखनी पड़ी और प्राधिकरण उसे पंजीकृत नहीं कर पा रही थी जिससे की सब को ही नुक्सान हो रहा था | अब फैसला आ जाने से बहुत अच्छे हालत हो गए है, खरीददार किराये से निज़ाद पा कर अपने घर में जा कर रह सकता है, निर्माणकर्ता अपने माकन बेच सकता है और राज्य सरकार स्टाम्प ड्यूटी के रूप में करोड़ों का धन अर्जित कर सकती है |” यह बताया श्री अमृत पल सिंह, कार्यकारी निदेशक, अप्रामेया ग्रुप ने | इस देरी से आए फैसले से रु २,५०० करोड़ तक के घाटे का अंदाज़ा लगाया जा सकता है जो की बिल्डर और खरीददार दोनों को लोन की किश्त के रूप मे चुकाना पड़ा, खरीददार कब्ज़ा मिलने का इंतज़ार कर रहे थे और बिल्डर को इकाइयाँ रोक कर रखनी पड़ी | इन सब से ज्यादा राज्य सरकार को घाटा हुआ क्योकि लगभग रु २,००० की स्टाम्प ड्यूटी इन संपत्तियों के पंजीकरण न होने से रुकी हुई थी | “ यह एक बड़ी राहत पहुचने वाली खबर है, खासकर उनके लिए जो की कब्ज़ा न मिलने के कारण किराये के मकानों में रह रहे थे | नोएडा क्षेत्र में पिछले दो सालो में संपत्तियों की रुकी हुई मांग का अब अंत आ गया है, यह फैसला भविष्य के खरीददार और निवेशको को अपनी ओर आकर्षित करेगा जो की सीधे तौर यहाँ पर मांग और संपत्ति की कीमतों में खासा इज़ाफा करने में समर्थ होगा |” यह निष्कर्ष दिया श्री कुशाग्र अंसल, निदेशक अंसल हाउसिंग ने |

Web Title : JUSTICE FINALLY SERVED TO THE BUYERS AND DEVELOPERS OF NOIDA



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