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ब्याज दरों के गिरने से मिलेगा सेक्टर को लाभ

Posted On: 1 Sep, 2015 बिज़नेस कोच में

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देश के अचल संपत्ति क्षेत्र को बढ़ावा देने में एक अहम भूमिका निभाने वाले बैंकिंग क्षेत्र ने अपनी ब्याज दर कम करने की ठान ली है जो की एक अच्छी खबर मानी जा सकती है | कुछ बैंकों ने अपनी ब्याज दर कम करी हैं तो किसी ने अपनी जमा दर कम करी जो की आने वाले वक़्त में ब्याज दर कम होने के साफ़ संकेत देती है | ब्याज दर कम होना सिधे तौर पर बराबर मासिक किश्तों (इक्वेटेड मंथली इनस्टॉलमेंट) को कम कर देता है जो की ग्राहकों के लिए फायदेमंद होता है | देश के दुसरे सबसे बड़े ने निजि बैंक एचडीएफसी के कल ही घोषणा करते हुए अपनी आधार दर को ३५ अंक मतलब ०.३५ प्रतिशत कम किया है और अब यह ९.७० से कम हो कर ९.३५ प्रतिशत पर आ गयी है | गौरतलब है की यह अब सबसे कम दर है और आईसीआईसीआई बैंक और एसबीआई को सीधी टक्कर देगा | इससे पहले भी कैनरा बैंक ने आधार दर को १० अंक गिरते हुए अपनी ब्याज दर को १० प्रतिशत से ९.९० प्रतिशत कर दिया था | एक्सिस बैंक अपनी जमा दरें आज से ०.२-०.५ प्रतिशत से कम करने वाला है जिससे की भविष्य में ऋण की ब्याज दर कम होने की उम्मीद लगाई जा सकती है|
“ऋण की ब्याज दरों में कटोती करने का फ़ैसला एकदम सही समय पर लिया गया है क्योंकि इस साल का अंतिम त्योहारों का महिना आने वाला है और लोगो की भावनाएं इससे जुड़े होने के करना बड़े स्तर पर मकानों की बिक्री होती हैं | बैंकों के लिए भी ज़रूरी हो गया था की वो दरों में कटोती करे क्योंकि आरबीआई के गवर्नर हाल ही में संकेत दे चुके थे और इस महीने के अंत तक आरबीआई की निति की समीक्षा भी होनी है और अगर बैंक भी साथ दे तो दरों में कटोती भी आ सकती है |” यह कहना है श्री दीपक कपूर, अध्यक्ष क्रेडाई-पश्चिम ऊ.प्र. और निदेशक, गुलशन होम्ज़ का | इसी विषय पर सहमति जताते हुए श्री अशोक गुप्ता, सीएमडी, अजनारा ग्रुप का मानना है की “बैंकों की ब्याज दर और अचल संपत्ति क्षेत्र का सीधा रिश्ता है, ऋण की ब्याज दरों में कटोती होना अचल संपत्ति में मांग का इज़ाफा कर देती है | इस बात में कोई संदेह नहीं है की दरों में कटोती का फैसला सही समय पर लिया गया है | हिन्दू कैलंडर के हिसाब से सबसे बड़े त्योहारों का समय आने में बस एक ही महिना बचा है और साल के इस वक्त बाज़ार सबसे ज्यादा मांग देखी जाती है, जिसके लिए लोग पूंजी जमा करना शुरू कर देते है | इस वक्त दरों में कटोती होना लोगो की भावनाओं पर में सुधर लायेगा जो की बाज़ार पर अच्छा प्रभाव डालेगा |
आरबीआई इस वर्ष में तीन बार ०.२५-०.२५ अंको की कटोती कर चुका है | ४ अगस्त को निति की समीक्षा के दोरान आरबीआई गवर्नर श्री रघुराम राजन ने कहा था की हम अपनी पिछली ३ समीक्षा में ७५ आधार अंक कम कर चुके है पर बैंकों ने उसे अभी तक ३० आधार अंक ही कम किया है इस लिए इस बार हम कटोती नहीं करेंगे | अगर बैंक चाहते है की हम आने वाली निति की समीक्षा में कुछ बेहतर करे तो पहले उन्हें दरों में कटोती करनी होगी | श्री कुशाग्र अंसल, निदेशक, अंसल हाउसिंग ने समझाते हुए कहा की “आरबीआई इस वर्ष रेपो दर में ७५ आधार अंक की कटोती कर के आरबीआई अपनी भूमिका को अच्छे से निभा चुकी है और अभी २ और निति समीक्षा बची हुई है | अब गेंद बैंकों के पाले में है, यह उनके लिए ज़रूरी हो गया है की उनको जो लाभ मिला है वो उसे जनता तक पहुचाएं वरना आने वाली निति की समीक्षा में आरबीआई नरमी नहीं बरतेगी | बैंकों ने दरों में कटोती कर के एक अच्छा कदम उठाया है जिसकी अचल संपत्ति क्षेत्र को काफी ज़रूरत थी क्योंकि बन कर तैयार हो चुके मकानों की संख्या देश भर में बढ़ती जा रही है |” इस विषय पर विचार जोड़ते हुए श्री सुदीप अग्रवाल, एमडी, श्री ग्रुप ने कहा की “कुछ बैंकों का अचानक से दरों में कटोती कर देना बाकी बैंकों पर भी दरें कम करने का दबाव डालेगा, यह भविष्य के ग्राहकों को आकर्षित करने में मद्द करेगा क्योंकि अब उन्हें हर महीने कम ईएमआई चुकानी पढ़ेगी और दूसरी तरफ भविष्य की मांग में सुधर देखने को मिलेगा चूँकि मकान की सम्पूर्ण कीमत काफी कम हो जाएगी | अब यह बहुत ज़रूरी हो गया है की बैंक अपनी दरें कम करे क्योंकि यह आरबीआई पर दबाव बनाएगी की वो अपनी आने वाली निति की समीक्षा में कुछ बेहतर करे |”
जिन बैंकों की लिक्विडिटी ज्यादा होती है वह बिना अपनी जमा दर कर किये ऋण दरों को कम कर सकते हैं पर जिन बैंकों की लिक्विडिटी कम है तो पहले वह अपनी जमा दर कम करते है ताकि वो अपनी लिक्विडिटी बढ़ा सके और फिर वो ऋण दरों में कटोती करने में समर्थ हो पाते है | जमा दर में गिरावट होना सावधि जमा (फिक्स्ड डिपाजिट) जैसे निवेशो से होने वाले लाभ को कम कर देता है | इसका मतलब यह हुआ की जो ज्यादा लिक्विडिटी वाले बैंक है वो तो अपने ग्राहक की हर मांग को पूरा करने में सक्षम है पर जो कम लिक्विडिटी वाले बैंक है या तो वो ज्यादा जमा दर रख सकते हैं या ऋण दरों को कम कर सकते है | “देश की वर्तमान आर्थिक स्थिति पर नज़र डाले तो यह ज़रूरी है की बैंक निवेश पर अच्छे लाभ और ऋण दरों में कमी में संतुलन बनायें रखे क्योंकि लोगो की भावनाएं इसमें अहम भूमिका निभाती है | दूसरा रास्ता जो की आरबीआई अपना सकती है वो यह है की वो बैंकों को अपनी आधार दर से कम पर आवास ऋण प्रदान करने की अनुमति दें दें इससे अचल संपत्ति की मांग और क्रेडिट को दोनों बढ़ावा मिलेगा, जिसका लाभ अचल संपत्ति क्षेत्र और बैंकिंग क्षेत्र को मिलेगा |” यह कहना है श्री रुपेश गुप्ता, निदेशक जेएम हाउसिंग का |
ज्यादा से ज्यादा बैंक ऋण दरों को कम करने की दोड़ में लग जाये तो यह जनता के लिए काफी अच्छी खबर होगी और इसका सबसे ज्यादा लाभ होगा देश के अचल संपत्ति क्षेत्र को | पिछले कुछ वर्षोँ में इस क्षेत्र के अन्दर कीमतों में काफी गिरावट आई है साथ ही बन कर तैयार हो चुके मकानों की संख्या में भी वृद्धि हुई है जिनको की दरों में गिरावट होने का अच्छा लाभ मिल सकता है | निष्कर्ष देते हुए श्री राजेश गोयल उपाध्यक्ष क्रेडाई-पश्चिम ऊ.प्र. और महानिदेशक, आरजी ग्रुप ने कहा की “लोगो की क्रय शक्ति कम है और भारत की जनता बड़ी खरीददारी के लिए ऋण लेती है यह आर्थिक चक्र को चलने में बैंकों की भूमिका को और अहम बना देती है | गौरतलब है की ऋण दर, ईएमआई पर सीधा असर डालती है और दरों में कटोती करने की इस वक़्त सक्त ज़रूरत है | भारत के बड़े बैंकों में से शुमार एचडीएफसी और कैनरा बैंक ने अपनी दरों में कटोती की हैं जिससे की ग्राहक काफी खुश है | खासकर के अब त्योहारों का समय बस आने ही वाला है तो यह एक बहुत अच्छा कदम है जो की रुकी हुई बिक्री को तेज़ी दे देगा |”

Web Title : SECTOR TO GAIN FROM REDUCED BANKING RATES



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