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आरबीआई की मोनिटरिंग पालिसी रिव्यु पर रियल एस्टेट इंडस्ट्री की प्रतिकिया

Posted On: 8 Apr, 2017 बिज़नेस कोच में

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वित्त वर्ष 2016-17 बहुत ही बेहतरीन उदहारण रहा है | किसी भी विकासशील अर्थव्यवस्था के लिए जिसमें रियल एस्टेट सेक्टर को उतार-चढ़ाव से गुज़रना पड़ा | बीते दो वर्षो में जितनी तेज़ी से रियल एस्टेट सेक्टर में त्योहारों के समय उछाल रहा | नोटबंदी होने से इसके आने वाले दो महीनो तक रियल एस्टेट पर असर देखने को मिला | रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (रेरा), स्मार्ट सिटी मिशन और प्रधानमन्त्री आवास योजना के आने से रियल एस्टेट सेक्टर में उछाल की सम्भावना पहले से अधिक हो सकती है | रियल सेक्टर ने भारत की अर्थव्यवस्था में बड़ी अहम् भूमिका निभाई है साथ ही भारतीय जीडीपी में इसका बहुत बड़ा योगदान भी रहा है और अंतिम उपयोगकर्ता की भूमिका निभाता आया है इसलिए इस सेक्टर से लोगों को बड़ी उम्मीदें है | इसके साथ ही रिज़र्व बैंक अपनी द्वी-मासिक मौद्रिक नीति से इस सेक्टर की अच्छी किस्मत बनाने में हमेशा से अहम् भूमिका निभाता आया है | रिज़र्व बैंक के इस बार के फैसले के आने के बाद रेपो रेट में कोई भी बदलाव नहीं आया है |
आरबीआई के मोनेटरी पालिसी रिव्यु में रेपो रेट में किसी भी प्रकार का परिवर्तन न करके उससे 6.25 पर ही रखा है | एलएएफ के कॉरिडोर के अंदर 25 बेसिक पॉइंट कम किया है जिस कारण रिवर्स रेपो रेट 6.0 प्रतिशत हो गया है | एलएएफ के अन्दर यह तालमेल से एमएसएफ में कटौती के बाद भी 6.5 प्रतिशत है जो की रिवर्स रेपो रेट से 50 बेसिक पॉइंट ज्यादा है |कैश रिज़र्व रेश्यो अभी 4 चार प्रतिशत है जबकि एसएलआर को 20.5 प्रतिशत पर रखा गया है | इसके जरिये भी सीधे तौर पर कोई लाभ नहीं होगा लेकिन रिवर्स रेपो रेट के बढ़ने और एमएसएफ के कम होने से बहुत कुछ प्राप्त होगा | आरबीआई ने ब्याज दरो के बढ़ने और ओवरनाइट ब्याज के रेट कम किया है |

रियल एस्टेट सेक्टर की प्रतिक्रिया:

मनोज गौर , प्रेसिडेंट –क्रेडाई एनसीआर एवं एमडी गौरसंस इंडिया-
ब्याज़ दरों को लगातार कम रखने के लिए आरबीआई द्वारा लिए गए ठोस कदम सराहनीय हैं खासतौर पर वित्तीय संस्थाओं के नजरिये से | रिवर्स रेपो रेट में बढ़ोतरी से, आरबीआई को मार्किट से पैसा ऊँचे रेट पर उठाना पड़ता है ,जिसके कारण बैंक्स भी अधीक मुनाफे में रहते | अब देखना ये हैं की इन सभी नीतियों एवं निर्णयों का फायदा वित्तीय संस्थाए कैसे उठाती हैं ताकि इनका लाभ सभी उपभोक्ताओं को मिल सके एवं मार्किट में सकरात्मक स्तिथि जारी रहे |

गौरव गुप्ता , जनरल सेक्रेटरी , क्रेडाई- राज नगर एक्सटेंशन

एमएसएफ को 6.25 की दर पर रखने से बैंक्स या वित्तीय संस्थाए अब आरबीआई से ओवरनाईट बोर्रोविंग के तहत कम दर पर क़र्ज़ ले सकते हैं ,जिससे उन्हें आगे उधार देने में ज्यादा आसानी होगी | बहरहाल अगर रेट्स में सीधे तौर से कोई कटौती की जाती तो इसका प्रभाव हमें रियल एस्टेट सेक्टर पर दिखने को मिलता, क्यूंकि हाल ही में आरबीआई द्वारा जारी हाउसिंग प्राइस इंडेक्स में भी बढ़ोतरी आंकी गयी हैं |

विकास भसीन, एमडी, साया ग्रुप-
वैश्विक विकास को देखते हुए , अग्रिम अर्थव्यवस्थाओं में तीव्र गति से बढ़ोतरी के साफ़ संकेत नज़र आ रहे हैं , और शायद यही वजह रही होगी की भारत की व्यापक अर्थव्यवस्था में भी बढ़ोतरी के संकेत को भांपते हुए आरबीआई ने मुख्य दरों में कोई भी बदलाव नहीं किया हैं | पर साल की शुरुआत में आरबीआई द्वारा ब्याज दरों में कमी से मार्किट में माहोल जरुर सुधरा हैं जिसका असर प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष दोनों ही तरीके से उपभोक्ताओं पड़ा हैं|

धीरज जैन , डायरेक्टर ,महागुन ग्रुप-

देश की इकॉनमी में हर तरफ लो इंटरेस्ट रेट का मौहोल है जिससे मुद्रास्फीति अर्थात मार्किट को इन्फ्लेशन का सामना करना पड़ सकता है | अत: आरबीआई जब तक पूरी तहर इस मुद्दे को कन्ट्रोल नही कर लेता तब तक के लिये इस तरह के फैसलें ही लिये जायेंगे; फरवरी तक इन्फ्लेशन का माहौल रहा है , और मार्च में ही इसमें कुछ गिरावट नज़र आने लगी है | अब अगले मोनेटरी पालिसी तक आरबीआई इन्फ्लेशन को और भी ज्यादा संतुलित रखने की कोशिश करेगी , और साथ ही भविष्य की नीतियों पर काम करेगी | तब तक वित्तीय संस्थाए को भी उपभोक्ताओं के हित में कार्य करते हुए नयी नीतिया लानी चाहिए |

राजेश गोयल ,वाईस प्रेसिडेंट क्रेडाई-वेस्टर्न युपी एवं एमडी आरजी ग्रुप -

आरबीआई द्वारा रेट कट्स को लेकर लिया गया फैसला काफी पूर्व अनुमानित रहा | बजट सत्र के बाजार धीरे धीरे अनपी गति में आ रहा है | आरबीआई द्वारा रेट में कटौती न करने से भी होम बुयेर्स को निराशा हाथ नही लग रही है | बैंकों ने पहले से ही होम लोन और इएमआई काफी कम हो चुकी है, जोकी खरीदारों और बाजार के लिये राहत की बात है |



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