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रियल एस्टेट ने जीएसटी का किया दोनों हाथों से स्वागत

Posted On: 3 Jul, 2017 बिज़नेस कोच में

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1 जुलाई 2017 से देश में एक कर प्रणाली यानि गुड्स एंड सर्विस टैक्स( जीएसटी) लागू होने जा रहा है | देश के लियेसबसे बड़े कर सुधारक माने जा रहें जीएसटी को सरकार पूरी क्षमता के साथ पूरे उद्योगों और सभी क्षेत्रों पर लागू कर रहाहै । देश की जीडीपी और रोजगार के क्षेत्र में रियल एस्टेट एक बढ़ा योगदानकर्ता है | देश भी किसी भी बड़ी नीति केकार्यान्वयन के दौरान इसकी प्रतिक्रियाएं, आपत्तियां और सुझावों को हमेशा माना जाता रहा है|
बहुप्रतीक्षित माल और सेवा कर (जीएसटी) अंततः सभी बाधाओं और भ्रम की स्थिति के बावजूद कार्यान्वित हो रहा है जहाँरियल एस्टेट सेक्टर में इसके करों को अंतिम रूप दे दिया है | रियल एस्टेट जमीन की ही एक सम्पति है जो न तो गुड्सऔर न ही सर्विस में गिना जाता है | परिणाम स्वरूप टैक्स पर किसी भी प्रकार का नकरात्मक असर न पड़े इसलिये इसकेलिये अलग सलूशन खोजा है | सरकार ने रियल एस्टेट सेक्टर को 18 प्रतिशत वाले कर स्लैब में रखा है सरकार जमीन पर18 प्रतिशत के दो तिहाई के अनुसार कर वसूलेगा जोकि अंत में 12 प्रतिशत रह जायेगा | सरकार ने जमीन के भाग में से33.4 भाग पर डिस्काउंट दिया है | सरकार ने लैंड को सम्पति होने के कारण जीएसटी के करों से बाहर रखा है |
इससे पहले सर्विस टैक्स की गणना के लिए एक अलग फार्मूला था जहां एक इकाई के निर्माण के लिए उपयोग किए गएजमीन और वस्तुओं के मूल्य से समायोजित करने के लिए संपत्ति के कुल मूल्य पर 70 प्रतिशत की कमी की अनुमति दीगई थी। इसलिए खरीदारों को संपत्ति के मूल्य के 30 प्रतिशत पर केवल 15 प्रतिशत का भुगतान करना पड़ता था। इसप्रकार अचल संपत्ति के लिए शुद्ध सेवा कर केवल 4.5 प्रतिशत था। जबकि अब निर्माणाधीन अचल संपत्ति के लिए जीएसटीदर का फैसला 18 प्रतिशत किया गया है लेकिन शुद्ध कर की घटना इकाई या संपत्ति के लिए बिक्री मूल्य के 12 प्रतिशत(18 के दो तिहाई) पर रहेगी।
सर्विस टैक्स के अतिरिक्त एक प्रॉपर्टी कई अन्य केंद्रीय और राज्य भत्तों से होकर गुजरती है जिसमें वैट, एक्साइज,पंजीकरण और स्टैंप शुल्क आदि शुल्क लगेगा | अलग-अलग राज्यों के साथ ये संयुक्त रूप से योगदान करते हैं औरलगभग 5-10 प्रतिशत के लिए कुल अप्रत्यक्ष कराधान लाते हैं | स्टाम्प ड्यूटी और पंजीकरण शुल्क खरीददार के लिए कुललागत में जोड़तें हैं | लेकिन जीएसटी के साथ, पंजीकरण और स्टैंप शुल्क के साथ 12 प्रतिशत टैक्स से अंडर-निर्माणइकाइयों के लिए संपत्ति की कीमतें बढ़ने की उम्मीद है यदि अगर डेवलपर्स द्वारा इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ नहीं प्राप्तकिया गया हो |
अब जीएसटी के लागू होने के बाद देश में रियल एस्टेट सेक्टर के कराधान में स्पष्टता, पारदर्शिता और एकरूपता आयेगी। जीएसटी कानून में एंटी-मुनाफ़ेदारी खंड जोड़ा गया जोकि अंतिम ग्राहक को इनपुट टैक्स क्रेडिट से उत्पन्न होने वालीकर में कमी के फायदे से गुजरना अनिवार्य होगा। उत्पादन के प्रत्येक चरण के दौरान प्रदत्त इनपुट करों के क्रेडिट के रूपमें मूल्य वृद्धि के बाद के चरणों में लाभ उठाया जा सकता है |
पूर्ण रूप से देखा जाये जीएसटी को उचित तरीके से लागू होने पर लंबे समय तक लाभकारी होने का अनुमान है इसकेसाथ ही निवेश कर क्रेडिट का लाभ खरीदारों को पारित नहीं किया जाता है। सामान्य तौर पर लंबी अवधि में जीएसटीअर्थव्यवस्था के लिये भारतीय सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में 1-2 प्रतिशत बढ़ोतरी के योगदान की उम्मीद है।

अवनीश सूद, डायरेक्टर, एरोस ग्रुप
जीएसटी के रूप में देश ने एक बड़े बदलाव की ओर कदम बढाया है | हमें पूरी उम्मीद है की देश की कर प्रणाली को एकसूत्र में बाँधने वाला यह बदलाव अन्य सेक्टरों की तरह रियल सेक्टर में भी पारदर्शिता लाएगा | हालाँकि जी एस टी केदूरदर्शी प्रभावों की झलक अभी से नज़र आने लगी है लेकिन इतने बड़े बदलाव के अनुरूप खुद को ढालने में डेवेलोपेर्सको कठिनाइयों का सामना भी करना पड़ सकता है | हालाँकि निवेशकों और स्टेकहोल्डर के लिए ऑफर्स पर लाभ मिलनेकी उम्मीद जताई जा सकती है |

अभिषेक बंसल, एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर, पैसिफिक ग्रुप
रियल्टी सेक्टर के लिए जीएसटी आने वाले दिनों में एक ऐतिहासिक कदम साबित होगा | अस्तव्यस्ता से घिरे सेक्टर केलिए जी एस टी में ऐसी कई बातें है जो सेक्टर के पुनरुथान में सहायक होगा | सभी तरह के अप्रत्यक्ष करों से मुक्ति,ट्रांसपोर्टेशन और लोजिस्टिक कॉस्ट में घटोतरी, इनपुट टैक्स क्रेडिट के साथ-साथ सरल कर प्रणाली जी एस टी कोऐतिहासिक बनाते है | घर खरीददार अब सीधे और आसन तरीके से घर खरीद सकेंगे जिससे रियल एस्टेट सेक्टर मेंउनकी संख्या बढ़ेगी |

मनोज गौर, वाईस-प्रेसिडेंट क्रेडाई नेशनल और एमडी, गौड़ संस ग्रुप
देश में टैक्स-प्रणाली को एक सूत्र में बांधने वाले जीएसटी का इंतजार खत्म हो चुका है | इससे रियल एस्टेट सेक्टर को बड़ेपैमाने पर लाभ होगा। सटीकता से परिभाषित जीएसटी इस क्षेत्र और इसके ग्राहकों को राहत देगा। खासकर कमर्शियलसेक्टर के लोग इससे अधिक फायदा पा सकेंगे क्यूंकि सेनवैट क्रेडिट का नुकसान उठाने वाले वर्तमान कर प्रणाली मेंलागत का लाभ उठा सकते हैं | साथ ही अगर जीएसटी में निरंतरता बरती जाएगी तो यह लागत को कम करने में भी मददकरेगा। इसे बेहद सरल और एक सूत्रीय संरचना में ढाला गया है | जो कंस्ट्रक्शन की लागत को कम करेगा | रियल्टी रेक्टरके सभी डेवेलपर्स और खरीददार इसका तहे-दिल से स्वागत करेंगे |

प्रदीप अग्रवाल को-फाउंडर और चेयरमैन, सिग्नेचर ग्लोबल
निश्चित ही देश के टैक्स जगत में एक बड़े बदलाव ने जगह ली है | सरकार को कंस्ट्रक्शन में आने वाली लागत, घर कीकीमतों में बढ़ोतरी और बायर्स पर इससे पड़ने वाले असर पर विशेष ध्यान देना होगा | बैंकों की लोन दरों को कम करनेकी कोशिश करने की ज़रूरत है | साथ ही किसी प्रॉपर्टी की आखिरी किस्तों तक दरें समान रहे | अफोर्डेबल हाउसिंग कोजीएसटी के दायरे से बाहर रखना सबसे सराहनीय कदम है | लेकिन मध्य स्तर के खरीददारों के लिए स्टाम्प ड्यूटी कोइसके दायरे से बाहर रखे जाने पर ध्यान देना चाहिए ।

अक्षय तनेजा, एमडी, टीडीआई इन्फ्राटेक
स्टील पर जीएसटी से पहले लगभग 18-19% का टैक्स देना पड़ता था, जिसे जी एस टी में भी 18% के स्लैब में रखा गया है ।तो इससे कीमतों में खासा प्रभाव देखने को नहीं मिलेगा | लेकिन स्टील की अतिरिक्त इकाइयों कोयला और आयरन परसभी की नज़रें टिकेंगी क्यूंकि इसे 5% की जीएसटी स्लैब में जगह मिली है | जिसका असर कीमतों पर सीधे तौर पर नज़रआएगा |

दीपक कपूर, प्रेसिडेंट क्रेडाई वेस्टर्न-यूपी और डायरेक्टर, गुलशन होम्ज़
जीएस टी रियल एस्टेट सेक्टर में पारदर्शिता लेगा औए इसके कानून में शामिल एंटी-प्रॉफीयरिंग क्लॉज के जरिये कर चोरीपर भी लगाम लगेगी | इनपुट टैक्स क्रेडिट से मिलने वाला फायदा खरीदारों के लिए सहायक होगा जो बदले
में रियल एस्टेट की नई मांग पैदा करेगा। रेरा और अब जीएसटी का मेल आने वाले 18-24 महीनों में भारतीय रिएल्टीसेक्टर की तस्वीर बदलेंगे | जीएसटी ने घरेलु निवेशकों के साथसाथ विदेशी निवेशकों के बीच अच्छी छाप छोड़ी है जिससेहम उम्मीद कर सकते हैं कि अगले कुछ सालों में रीयल एस्टेट में एफडीआई में दोगुनी बढ़ोतरी देखी जा सकती है |क्योंकि बहुत जल्द आरईआईटी और इनवीट्स भी अपनी गतिविधि तेज करेंगे |

गौरव गुप्ता, जनरल सेक्रेटरी, क्रेडाई आरएनई
प्रॉपर्टी में प्रयोग होने वाले सामानों की कीमतें जीएसटी के कार्यान्वयन के बाद ही बढ़ी हैं निर्माणाधीन परियोजनाएं को12% के कर स्लैब में रखा है जोकि पहले 4.5% था | स्टाम्प ड्यूटी और अन्य ऊर्ध्वाधरों करों में छूट ना होने के साथ घरखरीदारों को इस की खामी का सामना करना पड़ेगा | व्यापारियों को राहत देने के लिये सरकार ने इनपुट टैक्स क्रेडिट कीसुविधा दी है जिससे उनको काफी हद तक लाभ मिल सकेगा |

मनोज चौधरी, एमडी, एयरविल इंफ्रा लिमिटेड
इससे पहले इस क्षेत्र के होमबॉयर कर के दो रूपों के दबाव में थे जिसमें सर्विस टैक्स और वैट शामिल हैं और येआवासीय इकाइयों की खरीद पर बुक हो जाने से पहले पूरा हो चुकाने पड़ते थे । जीएसटी से पहले कई गैर-स्वीकार्य करलागतों के घटक थे जिनमें सीएसटी, एंट्री टैक्स, कस्टम ड्यूटी, एक्साइज ड्यूटी आदि जो डेवलपर द्वारा अपनी खरीद परभुगतान करता था जोकि मूल रूप से यूनिट्स के मूल्य निर्धारण के लिए अवयव थे | अब जीएसटी के साथ, एक एकल टैक्ससंरचना का पालन किया जाएगा जो अप्रत्यक्ष करों के गुणन और दोहराव को दूर करेगा और जो लेनदेन में पारदर्शिता कोबढ़ावा देंगे। हम उम्मीद कर रहे हैं कि आवासीय प्रॉपर्टी के स्थिर में 5-7 प्रतिशत और अगले 3-5 वर्षों के दौरानकमर्शियल प्रॉपर्टी में 10-15 प्रतिशत तक की मांग बढे ।

धीरज जैन, निदेशक, महागुन ग्रुप
रियल्टी एस्टेट सेक्टर में सीमेंट एक आवश्यक घटक है पहले इस में 24-25% तक टैक्स लगता था जोकि जीएसटी केकार्यान्वयन से 28% तक संशोधित होगा | यह सीधे प्रोजेक्ट की निर्माण लागत को प्रभावित करेगा जिससे प्रॉपर्टी के दामों मेंबढ़ोतरी होगी | हालांकि, दूसरी तरफ जीएसटी क्षेत्र पर सकारात्मक प्रभाव डालकर, अधिक पारदर्शिता लाएगा | यह इसकेबाद एक से अधिक कराधान प्रणाली को समाप्त कर देगा और प्रणाली को अधिक व्यवस्थित और सुव्यवस्थित बनायाजाएगा।

पियूष शर्मा, सीनियर वाईस प्रेजिडेंट, सिक्का ग्रुप
यह संपूर्ण देश के लिए एक ऐतिहासिक क्षण है, जहां पूरी तरह से टैक्स में सुधार कर लागू किया गया है जो लंबे समय मेंअर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने का काम करेगा । रियल एस्टेट सेक्टर में करों में जटिलता और टैक्स के ऊपर से कई करो कोसमाप्त कर एक कर लगाया जायेगा जिससे कर में स्पष्टता आयेगी और खरीददार प्रेरित होगें । इनपुट टैक्स क्रेडिट कीउपलब्धता को धीरे-धीरे खरीदारों तक पहंचाया जायेगा जिससे डिमांड में मांग को बढ़ेगी ।

विकास भसीन, एमडी, साया ग्रुप
आने वाले समय में कोई शक नहीं है की जीएसटी भारतीय रियल एस्टेट सेक्टर के लिए गेम चेंजर का काम करेगा ।खरीदारों के लिए यह व्यवस्था पारदर्शिता सुनिश्चित करने के साथ में स्थिति को भी मजबूद करेगा जिससे यह सेक्टरअगले कुछ सालों में अर्थव्यवस्था को मजबूद बनाने में और भी सहयोग करेगा और जीडीपी में उछाल देखने को मिलेगा।रियल एस्टेट क्षेत्र के लिए 12 प्रतिशत के कुल कर के कारण अफोर्डेबल हाउसिंग और बजट सेगमेंट के अन्दर आने वालीनिर्माणाधीन संपत्ति सस्ता हो सकती है जबकि लग्जरी या प्रीमियम श्रेणी की आवास वाली यूनिट्स की कीमत बढ़ने कीसंभावना है।

राकेश यादव, चेयरमैन, अन्तरिक्ष इंडिया ग्रुप
जीएसटी के तहत नए टैक्स दर के चलते अनुमानित निर्माणाधीन संपत्तियों की लागत में बढ़ोतरी होगी , सरकार को अबस्टांप ड्यूटी और पंजीकरण शुल्क कम करे और बहुत अधिक सब्सिडी दरों पर जमीन के पार्सल की पेशकश करने केलिए काम करना चाहिए। अगर बैंकों द्वारा होम लोन की कम ब्याज की जाये तो इस क्षेत्र में खरीदारों के बीच बहुतखुशियों की बात होगी और मांग में अचानक वृद्धि होगी इसी के साथ उसी समय, जीएसटी खरीदारों के लिए करों परअधिक स्पष्टता देगा जो अभी तक नहीं थी ।

कुशाग्र अंसल, डायरेक्टर, अंसल हाउसिंग
एकसमान करों के होने से खरीददारों को कई सहूलित होगी पहले कई तरह के करों के कारण खरीददारों को उनके बारेमें कम जानकारी हुआ करती थी | अब जीएसटी के आने के बाद करों में पारदर्शिता आयेगी जो इस सेक्टर को भविष्यसहयोग करेगा | निश्चित तौर जी एस टी रियल एस्टेट सेक्टर के लिये गेम चेंजेर का रोल अदा करेगा और विदेशी निवेश कीमांग जोर पकड़ेगी |

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